Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.95: 536 सगण:- प्रमथ आदि गणों से युक्त, 537 गणकार:- जो बाणासुर आदि भक्तों को अपने गणों में शामिल करते हैं, 538 भूतवाहनसारथी:- जो ब्रह्माजी को सारथी बनाते हैं, जो त्रिपुर के विनाश के लिए सभी प्राणियों के योगक्षेम का पालन करते हैं, 539 भस्मशाय:- जो राख पर सोते हैं, 540 भस्मगोप्त:- जो राख से रक्षा करते हैं, 541 भस्मभूत:—अश्मसरूप, 542 तरुः—कल्पवृक्षरूप, 543 गणः—भृंगिरिति तथा नंदिकेश्वर आदि पार्षद रूप॥ 95॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
536 सगण:- प्रमथ आदि गणों से युक्त, 537 गणकार:- जो बाणासुर आदि भक्तों को अपने गणों में शामिल करते हैं, 538 भूतवाहनसारथी:- जो ब्रह्माजी को सारथी बनाते हैं, जो त्रिपुर के विनाश के लिए सभी प्राणियों के योगक्षेम का पालन करते हैं, 539 भस्मशाय:- जो राख पर सोते हैं, 540 भस्मगोप्त:- जो राख से रक्षा करते हैं, 541 भस्मभूत:—अश्मसरूप, 542 तरुः—कल्पवृक्षरूप, 543 गणः—भृंगिरिति तथा नंदिकेश्वर आदि पार्षद रूप॥ 95॥
536 Sagan:—consisting of Pramath etc. Ganas, 537 Ganakaar:—one who includes devotees like Banasur etc. in His Ganas, 538 Bhootavahanasarathi:—one who makes Brahmaji the charioteer, who maintains the Yogakshema of all living beings for the destruction of Tripura, 539 Bhasmashay:—one who sleeps on ashes, 540 Bhasmagopta—one who protects with ashes, 541 भस्मभूत:—अश्मस्वरूप, 542 तरुः—कल्पव्रिक्षवरूप, 543 गानः—भृंगिरिति and Nandikeshwar etc. councilor form॥ 95॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥