Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.64: 276 सर्ववस:—जो सर्वत्र निवास करते हैं, 277 सर्वचारी:—जो सर्वत्र विचरण करते हैं, 278 दुर्वासा:—जो अनन्त और विशाल होने के कारण वस्त्र से आच्छादित होने के योग्य नहीं हैं, 279 वसव:—इन्द्र के स्वरूप हैं, 280 अमर:—अविनाशी हैं, 281 हम:—हिम पिंड—हिमालय रूप हैं, 282 हेमकर:—सोना उत्पन्न करने वाले, 283 यज्ञ:—कर्म से रहित हैं, 284 सर्वधारी—सब कुछ धारण करने वाले, 285 धरोत्तम:—धारण करने वालों में श्रेष्ठ—जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण करते हैं । 64॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
276 सर्ववस:—जो सर्वत्र निवास करते हैं, 277 सर्वचारी:—जो सर्वत्र विचरण करते हैं, 278 दुर्वासा:—जो अनन्त और विशाल होने के कारण वस्त्र से आच्छादित होने के योग्य नहीं हैं, 279 वसव:—इन्द्र के स्वरूप हैं, 280 अमर:—अविनाशी हैं, 281 हम:—हिम पिंड—हिमालय रूप हैं, 282 हेमकर:—सोना उत्पन्न करने वाले, 283 यज्ञ:—कर्म से रहित हैं, 284 सर्वधारी—सब कुछ धारण करने वाले, 285 धरोत्तम:—धारण करने वालों में श्रेष्ठ—जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण करते हैं । 64॥
276 Sarvavas:—one who resides everywhere, 277 Sarvachari—one who wanders everywhere, 278 Durvasa:—who is rare to be covered with clothes because of being infinite and immense, 279 Vasava:—in the form of Indra, 280 amar:—indestructible, 281 ham:—snow mass—himalayan form, 282 hemkar:—producer of gold, 283 ayagya:—free from karma, 284 Sarvdhari—one who holds everything, 285 Dharottama:—the best among the bearers—one who holds the entire universe. 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥