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mahabharat 13.18.61: 257 सर्वतुर्यानीनादि - सब प्रकार के वाद्य बजाने वाले, 258 सर्वतोद्यपरिग्रह: - सब वाद्यों को एकत्रित करने वाले, 259 व्यालरूप: - शेषनाग रूप, 260 गुहावासी - सबके हृदयगुफा में निवास करने वाले, 261 गुहा: - कार्तिकेय रूप, 262 माली - माला धारण करने वाले, 263 तरंगवीत - भूख, प्यास आदि छह इच्छाओं को जानने वाले। साक्षी । 61॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  13.18.61 
सर्वतूर्यनिनादी च सर्वातोद्यपरिग्रह:।
व्यालरूपो गुहावासी गुहो माली तरङ्गवित्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
257 सर्वतुर्यानीनादि - सब प्रकार के वाद्य बजाने वाले, 258 सर्वतोद्यपरिग्रह: - सब वाद्यों को एकत्रित करने वाले, 259 व्यालरूप: - शेषनाग रूप, 260 गुहावासी - सबके हृदयगुफा में निवास करने वाले, 261 गुहा: - कार्तिकेय रूप, 262 माली - माला धारण करने वाले, 263 तरंगवीत - भूख, प्यास आदि छह इच्छाओं को जानने वाले। साक्षी । 61॥
 
257 Sarvaturyaninadi - one who plays all types of musical instruments, 258 Sarvatodyaparigraha: - one who collects all musical instruments, 259 Vyalarupa: - Sheshnag form, 260 Guhavaasi - one who resides in everyone's heart cave, 261 Guha: - Kartikeya form, 262 Mali - garland bearer, 263 Tarangvit - Knower of the six desires like hunger, thirst etc. Witness. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)