श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 180
 
 
श्लोक  13.18.180 
मार्कण्डेयान्मया प्राप्तो नियमेन जनार्दन।
तवाप्यहममित्रघ्न स्तवं दद्यां ह्यविश्रुतम्॥ १८०॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन जनार्दन! यह स्तोत्र मुझे मार्कण्डेय जी से नियमानुसार प्राप्त हुआ था। यह स्तोत्र अभी अधिक प्रसिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए मैं इसका उपदेश आपको दे रहा हूँ।
 
Shatrusudan Janardan! I had received this hymn from Markandeya as per the rules. This hymn has not become very famous yet, hence I am preaching it to you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)