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mahabharat 13.18.173: जो मनुष्य भगवान शिवस्वरूप इस स्तोत्र का परम भक्तिपूर्वक पाठ करते हैं, वे वही सिद्धि प्राप्त करते हैं जो सांख्य विद्वान् और योगीजन प्राप्त करते हैं ॥173॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 173
 
 
श्लोक  13.18.173 
एवमेतत् पठन्ते य एकभक्त्या तु शङ्करम्।
या गति: सांख्ययोगानां व्रजन्त्येतां गतिं तदा॥ १७३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य भगवान शिवस्वरूप इस स्तोत्र का परम भक्तिपूर्वक पाठ करते हैं, वे वही सिद्धि प्राप्त करते हैं जो सांख्य विद्वान् और योगीजन प्राप्त करते हैं ॥173॥
 
Those who recite this stotra in the form of Lord Shiva with utmost devotion, attain the same success that Sankhya scholars and yogis attain. 173॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)