स्तवमेतं भगवतो ब्रह्मा स्वयमधारयत्।
गीयते च स बुद्धॺेत ब्रह्मा शंकरसंनिधौ॥ १७१॥
अनुवाद
भगवान शंकर के इस स्तोत्र को स्वयं ब्रह्माजी ने अपने हृदय में धारण किया है। वे भगवान शिव के समीप इस वेदरूपी स्तुति का गान करते रहते हैं; अतः सभी को इस स्तोत्र का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए ॥171॥
Brahmaji himself has kept this stotra of Lord Shankar in his heart. They keep singing this Veda-like praise near Lord Shiva; Therefore everyone should acquire the knowledge of this stotra. 171॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥