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इति तेनेन्द्रकल्पेन भगवान् सदसत्पति:।
कृत्तिवासा: स्तुत: कृष्ण तण्डिना शुभबुद्धिना॥ १७०॥
अनुवाद
हे श्रीकृष्ण! ऐसा विचार करके इन्द्र के समान तेजस्वी और शुभचिन्तक तण्डि मुनि ने हाथी की खाल धारण करने वाले और समस्त कारणों के स्वामी भगवान शिव की स्तुति की ॥170॥
Sri Krishna! Thinking this, Tandi Muni, who was as bright and well-intentioned as Indra, praised Lord Shiva, the one wearing elephant skin and the master of all causes. 170॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥