Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.147: 947 देवासुरेश्वर:-देवताओं और दानवों के भगवान, 948 विश्व:-विराट स्वरूप, 949 देवासुरमहेश्वर:-देवताओं और दानवों के महान भगवान, 950 सर्वदेवमय:-देवताओं के पूर्ण रूप, 951 अचिंत्य:-अचिंत्य रूप, 952 देवात्मा-देवताओं के अन्तर्यामी, 953 आत्मसंभव:-स्वयंभू। | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
947 देवासुरेश्वर:-देवताओं और दानवों के भगवान, 948 विश्व:-विराट स्वरूप, 949 देवासुरमहेश्वर:-देवताओं और दानवों के महान भगवान, 950 सर्वदेवमय:-देवताओं के पूर्ण रूप, 951 अचिंत्य:-अचिंत्य रूप, 952 देवात्मा-देवताओं के अन्तर्यामी, 953 आत्मसंभव:-स्वयंभू।
947 Devasureshwar:—Lord of the gods and demons, 948 Vishwa:—Virat Swaroop, 949 Devasuramaheshwar:—Great God of the gods and demons, 950 Sarvadevamay:—Complete form of gods, 951 Achintya:—Achintya form, 952 Devatma—Insoul of the gods, 953 Atmasambhava:—Swayambhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥