Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.135: 857 गभस्ति:-सूर्य स्वरूप, 858 ब्रह्माकृत-वेदों का अविष्कार करने वाले, 859 ब्राह्मी-वेदाध्यायी, 860 ब्रह्मवित्-वेदार्थवेता, 861 ब्राह्मण:-ब्रह्मनिष्ठा, 862 गति:-ब्रह्मनिष्ठों की परम गति, 863 अनंतरूपा:-अनंत रूप वाले, 864 नाइकात्म-अनेक देहधारी, 865 तिग्मतेजा: स्वायंभुव: - ब्रह्माजी से भी अधिक शक्तिशाली। 135॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
857 गभस्ति:-सूर्य स्वरूप, 858 ब्रह्माकृत-वेदों का अविष्कार करने वाले, 859 ब्राह्मी-वेदाध्यायी, 860 ब्रह्मवित्-वेदार्थवेता, 861 ब्राह्मण:-ब्रह्मनिष्ठा, 862 गति:-ब्रह्मनिष्ठों की परम गति, 863 अनंतरूपा:-अनंत रूप वाले, 864 नाइकात्म-अनेक देहधारी, 865 तिग्मतेजा: स्वायंभुव: - ब्रह्माजी से भी अधिक शक्तिशाली। 135॥
857 Gabhasti:—the form of the sun, 858 Brahmakrit—the one who invented the Vedas, 859 Brahmi—the Vedadhyayi, 860 Brahmavit—the Vedarthveta, 861 Brahmin:—Brahmanishtha, 862 Gati:—the supreme speed of those who are Brahmanishthas, 863 Anantrupa:—one with infinite form, 864 Naikatma—many embodied ones, 865 Tigmateja: Swayambhuva:- more powerful than Brahmaji. 135॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥