श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 114
 
 
श्लोक  13.18.114 
वाहिता सर्वभूतानां निलयश्च विभुर्भव:।
अमोघ: संयतो ह्यश्वो भोजन: प्राणधारण:॥ ११४॥
 
 
अनुवाद
694 सर्वभूतानाम वहिता - सभी जीवित प्राणियों का भार उठाना, 695 सर्वभूतानाम निलय: - सभी जीवित प्राणियों का निवास, 696 विभु: - सर्वव्यापी, 697 भव: - शक्ति रूप, 698 अमोघ: - कभी असफल नहीं होना, 699 संयतः - संयमित, 700 अश्व: - उच्चै:श्रवा, सर्वोत्तम अश्व रूप, 701 भोजन:—अन्न प्रदान करने वाला, 702 प्राणधारण: सबके जीवन की रक्षा करने वाला। 114॥
 
694 Sarvabhutanaam Vahita—carrying the burden of all the living beings, 695 Sarvabhootanaam Nilayah—abode of all living beings, 696 Vibhu:—omnipresent, 697 Bhava:—form of power, 698 Amogha:—never failing, 699 Samyatah—restrained, 700 Ashva:—Ucchai:shrava, the best horse form, 701 Bhojan:—provider of food, 702 Pranadharan: One who protects everyone's life. 114॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)