Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.18.102: 597 बहुधा निंदित:—दक्ष और उनके समर्थकों द्वारा अनेक प्रकार से निन्दा किए जानेवाले, 598 शर्व:—प्रलयकाल में सबका नाश करनेवाले, 599 शंकर:—कल्याण करनेवाले, 600 शंकर:—भक्तों को आनन्द देनेवाले, 601 अधन:—सांसारिक सम्पदासे वंचित, 602 अमरेश:—देवताओंके भी स्वामी, 603 महादेव:—देवताओंद्वारा भी पूजित, 604 विश्वदेव:—सम्पूर्ण जगतके पूज्य देवता, 605 सुररिहा—देवताओंके शत्रुओंका संहार करनेवाले ॥102॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  13.18.102 
बहुधा निन्दत: शर्व: शङ्कर: शङ्करोऽधन:।
अमरेशो महादेवो विश्वदेव: सुरारिहा॥ १०२॥
 
 
अनुवाद
597 बहुधा निंदित:—दक्ष और उनके समर्थकों द्वारा अनेक प्रकार से निन्दा किए जानेवाले, 598 शर्व:—प्रलयकाल में सबका नाश करनेवाले, 599 शंकर:—कल्याण करनेवाले, 600 शंकर:—भक्तों को आनन्द देनेवाले, 601 अधन:—सांसारिक सम्पदासे वंचित, 602 अमरेश:—देवताओंके भी स्वामी, 603 महादेव:—देवताओंद्वारा भी पूजित, 604 विश्वदेव:—सम्पूर्ण जगतके पूज्य देवता, 605 सुररिहा—देवताओंके शत्रुओंका संहार करनेवाले ॥102॥
 
597 Bahudha Nindit:—Criticized in many ways by Daksh and his supporters, 598 Sharva:—The destroyer of all in the doomsday, 599 Shankar:—The doer of welfare, 600 Shankar:—The one who gives joy to the devotees, 601 Adhan:—Deprived of worldly wealth, 602 Amaresh:—Lord of the gods also, 603 Mahadev:—Worshiped by the gods as well, 604 Vishvadev:—the worshipable deity of the entire world, 605 Surariha—killer of the enemies of the gods. 102॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)