Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.42: राजन! वे ही इस जगत् की रचना करने वाले हैं और ये आत्मावत श्रीकृष्ण अपनी शक्ति से सबको जीवन प्रदान करते हैं। देवता, दानव, मनुष्य, जगत्, ऋषि, पितर, प्रजा और संक्षेप में सभी जीव उन्हीं से जीवन प्राप्त करते हैं। ये भगवान भूतनाथ सदैव सभी जीवों की क्रमबद्ध सृष्टि की कामना करते हैं। 42. | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तेन विश्वं कृतमेतद्धि राजन्
स जीवयत्यात्मनैवात्मयोनि:।
ततो देवानसुरान् मानवांश्च
लोकानृषींश्चापि पितृॄृन् प्रजाश्च।
समासेन विधिवत्प्राणिलोकान्
सर्वान् सदा भूतपति: सिसृक्षु:॥ ४२॥
अनुवाद
राजन! वे ही इस जगत् की रचना करने वाले हैं और ये आत्मावत श्रीकृष्ण अपनी शक्ति से सबको जीवन प्रदान करते हैं। देवता, दानव, मनुष्य, जगत्, ऋषि, पितर, प्रजा और संक्षेप में सभी जीव उन्हीं से जीवन प्राप्त करते हैं। ये भगवान भूतनाथ सदैव सभी जीवों की क्रमबद्ध सृष्टि की कामना करते हैं। 42.
King! He is the one who has created this world and this soul born Sri Krishna gives life to everyone with his own power. Gods, demons, humans, world, sages, ancestors, people and in short all living beings get life from him. This Lord Bhootnath always desires the creation of all living beings in a systematic manner. 42.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥