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mahabharat 13.174.18: यदि आप कहते हैं कि, 'ब्रह्मा आकाश से प्रकट हुए हैं, तो वे किस आधार पर खड़े हैं, यह मुझे बताइए, क्योंकि उस समय कोई दूसरा आधार नहीं है', तो इसके उत्तर में यह निवेदन है कि वहाँ ब्रह्मा को अहंकारमय बताया गया है, जो सर्वत्र व्याप्त और सम्पूर्ण तेजों से समर्थ कहा गया है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 13.174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.174.18 
तिष्ठेत् कथमितिब्रूहि न किंचिद्धि तदा भवेत्।
अहङ्कार इति प्रोक्त: सर्वतेजोगत: प्रभु:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यदि आप कहते हैं कि, 'ब्रह्मा आकाश से प्रकट हुए हैं, तो वे किस आधार पर खड़े हैं, यह मुझे बताइए, क्योंकि उस समय कोई दूसरा आधार नहीं है', तो इसके उत्तर में यह निवेदन है कि वहाँ ब्रह्मा को अहंकारमय बताया गया है, जो सर्वत्र व्याप्त और सम्पूर्ण तेजों से समर्थ कहा गया है॥18॥
 
If you say, 'Brahma has appeared from the sky, then tell me on what basis he stands, because at that time there is no other basis', then in answer to this it is requested that Brahma has been described there as an egoistic figure, who is said to be pervading and capable of all the radiance.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)