श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 174: वायुद्वारा उदाहरणसहित ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.174.14 
अथवा ब्राह्मणश्रेष्ठमनुभूतानुपालकम्।
कर्तारं जीवलोकस्य कस्माज्जानन् विमुह्यसे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अथवा श्रेष्ठ ब्राह्मण ही प्रत्येक प्राणी का रक्षक और चराचर जगत का रचयिता है। यह जानते हुए भी तुम इस मोह में क्यों लीन हो?॥14॥
 
Or the best Brahmin is the protector of every living being and the creator of the living world. Even after knowing this, why are you engrossed in this delusion? ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)