Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.173.18: प्रजा की रक्षा का धर्म क्षत्रियों पर ही निर्भर है। क्षत्रियों से ही ब्राह्मणों की जीविका चलती है। फिर ब्राह्मण क्षत्रिय से श्रेष्ठ कैसे हो सकता है?॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.173: कार्तवीर्य अर्जुनको दत्तात्रेयजी से चार वरदान प्राप्त होनेका एवं उनमें अभिमानकी उत्पत्तिका वर्णन तथा ब्राह्मणोंकी महिमाके विषयमें कार्तवीर्य अर्जुन और वायुदेवताके संवादका उल्लेख । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रजा की रक्षा का धर्म क्षत्रियों पर ही निर्भर है। क्षत्रियों से ही ब्राह्मणों की जीविका चलती है। फिर ब्राह्मण क्षत्रिय से श्रेष्ठ कैसे हो सकता है?॥18॥
The religion of protecting the people is dependent on the Kshatriyas only. It is from the Kshatriyas that the Brahmins get their livelihood. Then how can a Brahmin be superior to a Kshatriya?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥