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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 171: जपनेयोग्य मन्त्र और सबेरे-शाम कीर्तन करनेयोग्य देवता, ऋषियों और राजाओंके मंगलमय नामोंका कीर्तन-माहात्म्य तथा गायत्रीजपका फल
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श्लोक 69
श्लोक
13.171.69
न च राजभयं तेषां न पिशाचान्न राक्षसात्।
नाग्न्यम्बुपवनव्यालाद् भयं तस्योपजायते॥ ६९॥
अनुवाद
गायत्री मन्त्र का जप करने से द्विज को राजा, भूत, पिशाच, अग्नि, जल, वायु और सर्प आदि का भय नहीं रहता ॥69॥
By chanting the Gayatri Mantra, the Dwija has no fear of kings, ghosts, devils, fire, water, wind and snakes etc. ॥ 69॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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