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mahabharat 13.170.9-12: हे पृथ्वी के स्वामी! जो महान तेजस्वरूप हैं, महान तपस्वरूप हैं, महान ब्रह्म हैं, सबके परम आश्रय हैं, समस्त पवित्र तीर्थों में परम पवित्र हैं, समस्त मंगलों में भी मंगलमय हैं, देवताओं के भी देव हैं और समस्त प्राणियों के सनातन पिता हैं, जिनसे कालचक्र के प्रारम्भ में समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं और युग के अन्त में महाप्रलय में लीन हो जाते हैं, उन जगत के स्वामी भगवान विष्णु के सहस्र नामों को सुनो, जो समस्त पापों और जगत के भय को दूर करते हैं। ॥9-12॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 9-12
 
 
श्लोक  13.170.9-12 
परमं यो महत्तेज: परमं यो महत्तप:।
परमं यो महद्‍ब्रह्म परमं य: परायणम्॥ ९॥
पवित्राणां पवित्रं यो मङ्गलानां च मङ्गलम्।
दैवतं देवतानां च भूतानां योऽव्यय: पिता॥ १०॥
यत: सर्वाणि भूतानि भवन्त्यादियुगागमे।
यस्मिंश्च प्रलयं यान्ति पुनरेव युगक्षये॥ ११॥
तस्य लोकप्रधानस्य जगन्नाथस्य भूपते।
विष्णोर्नामसहस्रं मे शृणु पापभयापहम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पृथ्वी के स्वामी! जो महान तेजस्वरूप हैं, महान तपस्वरूप हैं, महान ब्रह्म हैं, सबके परम आश्रय हैं, समस्त पवित्र तीर्थों में परम पवित्र हैं, समस्त मंगलों में भी मंगलमय हैं, देवताओं के भी देव हैं और समस्त प्राणियों के सनातन पिता हैं, जिनसे कालचक्र के प्रारम्भ में समस्त प्राणी उत्पन्न होते हैं और युग के अन्त में महाप्रलय में लीन हो जाते हैं, उन जगत के स्वामी भगवान विष्णु के सहस्र नामों को सुनो, जो समस्त पापों और जगत के भय को दूर करते हैं। ॥9-12॥
 
O lord of the earth! He who is the form of the greatest radiance, the form of the greatest austerity, the greatest Brahman, the ultimate shelter of all, the most sacred of all purifying places of pilgrimage, the auspicious of all auspicious things, the god of gods and the eternal father of all beings, from whom all beings are born at the beginning of a cycle of time and then at the end of an era they get absorbed in the great deluge, listen to the thousand names of that lord of the universe, Lord Vishnu, who removes all sins and the fear of the world. ॥9-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)