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mahabharat 13.170.45: 290 भूतभाव्यभवनाथ: -भूत, भविष्य और वर्तमान के स्वामी, 291 पवन: -वायु रूप, 292 पवन: -जगत को पवित्र करने वाले, 293 अनल: -अग्नि रूप, 294 काम: -अपने भक्तों की इच्छा का नाश करने वाले, 295 कामकृत -भक्तों की कामना पूर्ण करने वाले, 296 कांत: -काम्य रूप, 297 काम: -(अ) ब्रह्मा, (अ) विष्णु, (म) महादेव - इस प्रकार त्रिदेवों के रूप में, 298 कामप्रद: -भक्तों को उनकी इच्छित वस्तुएँ प्रदान करने वाले, 299 प्रभु: -सर्वशक्तिमान । 45॥   |   mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम्  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  13.170.45 
भूतभव्यभवन्नाथ: पवन: पावनोऽनल:।
कामहा कामकृत् कान्त: काम: कामप्रद: प्रभु:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
290 भूतभाव्यभवनाथ: -भूत, भविष्य और वर्तमान के स्वामी, 291 पवन: -वायु रूप, 292 पवन: -जगत को पवित्र करने वाले, 293 अनल: -अग्नि रूप, 294 काम: -अपने भक्तों की इच्छा का नाश करने वाले, 295 कामकृत -भक्तों की कामना पूर्ण करने वाले, 296 कांत: -काम्य रूप, 297 काम: -(अ) ब्रह्मा, (अ) विष्णु, (म) महादेव - इस प्रकार त्रिदेवों के रूप में, 298 कामप्रद: -भक्तों को उनकी इच्छित वस्तुएँ प्रदान करने वाले, 299 प्रभु: -सर्वशक्तिमान । 45॥
 
290 Bhootabhavyabhavannath: -Lord of the past, future and present, 291 Pawan: -Vayu form, 292 Pavan: -One who purifies the world, 293 Anal: -In the form of fire, 294 Kamha -One who destroys the desire of his devotees, 295 Kamakrit -One who fulfills the wishes of the devotees, 296 Kant: -Kamaniya form, 297 Kama: -(a) Brahma, (A) Vishnu, (M) Mahadev - thus in the form of Trinity, 298 Kamprada: -One who provides the devotees with their desired things, 299 Prabhu: -All-powerful. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)