Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.170.33: 181 महेश्वस: - महान धनुष वाले, 182 महिभ्रता - पृथ्वी को धारण करने वाले, 183 श्रीनिवास: - श्री को अपने वक्षस्थल में निवास देने वाले, 184 शतान गति: - पुण्यात्माओं के परम आश्रय, 185 अनिरुद्ध: - जिन्हें कोई नहीं रोकता, 186 सुरानंद: - देवताओं को प्रसन्न करने वाले, 187 गोविंद: - वेदवाणी से स्वयं को प्राप्त करने वाले। दाता, 188 गोविंदन पति: - वेदवाणी जानने वालों के प्रभु। 33॥ | mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
181 महेश्वस: - महान धनुष वाले, 182 महिभ्रता - पृथ्वी को धारण करने वाले, 183 श्रीनिवास: - श्री को अपने वक्षस्थल में निवास देने वाले, 184 शतान गति: - पुण्यात्माओं के परम आश्रय, 185 अनिरुद्ध: - जिन्हें कोई नहीं रोकता, 186 सुरानंद: - देवताओं को प्रसन्न करने वाले, 187 गोविंद: - वेदवाणी से स्वयं को प्राप्त करने वाले। दाता, 188 गोविंदन पति: - वेदवाणी जानने वालों के प्रभु। 33॥
181 Maheshvas: - the one with great bow, 182 Mahibharta - the one who holds the earth, 183 Srinivas: - the one who gives residence to Shri in his chest, 184 Satan Gati: - the supreme shelter of the virtuous, 185 Aniruddha: - who is not stopped by anyone, 186 Surananda: - the one who makes the gods happy, 187 Govind: - gets himself achieved through Vedavani. Giver, 188 Govidan Pati: -Lord of those who know Vedavani. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥