Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.170.18: 37 स्वयंभू:- जो स्वयं उत्पन्न हुए हैं, 38 शम्भू:- जो भक्तों के लिए सुख का सृजन करते हैं, 39 आदित्य:- जो बारह आदित्यों में विष्णु नामक आदित्य हैं, 40 पुष्कराक्ष:- जिनके कमल के समान नेत्र हैं, 41 महाश्वान:- जिनकी वेद रूपी अत्यन्त महान वाणी है, 42 अनादिनिधान:- जो जन्म-मरण से रहित हैं, 43 धाता:- जो जगत् का धारण-पोषण करते हैं, 44 प्रजापति:- जो कर्म और उसके फल का निर्माण करते हैं, 45 धातारुत्तम:- जो कारण और प्रभाव रूप में सम्पूर्ण जगत् को धारण करते हैं और सर्वश्रेष्ठ हैं ॥18॥ | mahabharat अध्याय 13.170: श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रम् । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
37 स्वयंभू:- जो स्वयं उत्पन्न हुए हैं, 38 शम्भू:- जो भक्तों के लिए सुख का सृजन करते हैं, 39 आदित्य:- जो बारह आदित्यों में विष्णु नामक आदित्य हैं, 40 पुष्कराक्ष:- जिनके कमल के समान नेत्र हैं, 41 महाश्वान:- जिनकी वेद रूपी अत्यन्त महान वाणी है, 42 अनादिनिधान:- जो जन्म-मरण से रहित हैं, 43 धाता:- जो जगत् का धारण-पोषण करते हैं, 44 प्रजापति:- जो कर्म और उसके फल का निर्माण करते हैं, 45 धातारुत्तम:- जो कारण और प्रभाव रूप में सम्पूर्ण जगत् को धारण करते हैं और सर्वश्रेष्ठ हैं ॥18॥
37 Swayambhu: - One who is self-born, 38 Shambhu: - One who creates happiness for the devotees, 39 Aditya: - Aditya named Vishnu among the twelve Adityas, 40 Pushkaraksh: - One with eyes like lotus, 41 Mahasvan: - One who has a very great voice in the form of Vedas, 42 Anadinidhan: - Free from birth and death, 43 Dhata - One who sustains the world, 44 Creator. -The one who creates karma and its fruits, 45 Dhataruttam: -The one who holds the entire universe in the form of cause and effect and is the best. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥