श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  13.17.72 
उपमन्युरुवाच
एतान् दत्त्वा वरान् देवो वन्द्यमान: सुरर्षिभि:।
स्तूयमानश्च विबुधैस्तत्रैवान्तरधीयत॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
उपमन्यु ने कहा - ये वर देकर महादेवजी देवताओं द्वारा पूजित और स्तुति पाकर वहाँ अन्तर्धान हो गए ॥72॥
 
Upamanyu said - Mahadevji, after giving these boons, being worshiped by the gods and praised by the gods, disappeared there. 72॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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