Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.17.70-71h: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मेरी कृपा से तुम्हें एक विद्वान पुत्र प्राप्त होगा, जिसके पास ऋषिगण भी शिक्षा प्राप्त करने जाएँगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह कल्पसूत्र की रचना करेगा। पुत्र! कहो, तुम क्या चाहते हो? अब मैं तुम्हें कौन-सा मनचाहा वर दूँ?॥70 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऋषीणामभिगम्यश्च सूत्रकर्ता सुतस्तव।
मत्प्रसादाद् द्विजश्रेष्ठ भविष्यति न संशय:॥ ७०॥
कं वा कामं ददाम्यद्य ब्रूहि यद् वत्स काङ्क्षसे।
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मेरी कृपा से तुम्हें एक विद्वान पुत्र प्राप्त होगा, जिसके पास ऋषिगण भी शिक्षा प्राप्त करने जाएँगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि वह कल्पसूत्र की रचना करेगा। पुत्र! कहो, तुम क्या चाहते हो? अब मैं तुम्हें कौन-सा मनचाहा वर दूँ?॥70 1/2॥
O best of Brahmins! By my grace you will get a learned son, to whom even sages will go to get education. There is no doubt that he will create Kalpasutra. Son! Tell me, what do you want? Now which desired boon should I give you?॥ 70 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥