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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल
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श्लोक 69
श्लोक
13.17.69
श्रीभगवानुवाच
अक्षयश्चाव्ययश्चैव भविता दु:खवर्जित:।
यशस्वी तेजसा युक्तो दिव्यज्ञानसमन्वित:॥ ६९॥
अनुवाद
भगवान् श्री शिवजी ने कहा- ब्रह्मन्! तुम अक्षय, अविनाशी, शोकरहित, यशस्वी, तेजस्वी और दिव्य ज्ञान से युक्त होगे॥69॥
Lord Shri Shiva said-Brahman! You will be inexhaustible, imperishable, sorrowless, successful, brilliant and full of divine knowledge. 69॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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