श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  13.17.64 
ज्ञानविज्ञानयुक्तानां निरुपाख्या निरञ्जना।
कैवल्या या गतिर्देव परमा सा गतिर्भवान्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
भगवन्! आप निरंजन और कैवल्य रूप परमपद को प्राप्त करने वाले हैं, सारूप्य आदि नामों से रहित हैं, ज्ञान और विज्ञान से युक्त पुरुषों के द्वारा युक्त हैं॥64॥
 
God! You are the one who attains the supreme state in the form of Niranjan and Kaivalya, devoid of names like Sarupya etc., possessed by men with knowledge and science. 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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