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श्री महाभारत
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अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल
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श्लोक 63
श्लोक
13.17.63
अपुनर्भवकामानां वैराग्ये वर्ततां च या।
प्रकृतीनां लयानां च सा गतिस्त्वं सनातन॥ ६३॥
अनुवाद
हे सनातन परमेश्वर! आप वैराग्य मार्ग पर चलने वालों और प्रकृति में लीन रहने वालों को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं ॥ 63॥
Eternal God! You are the one who grants salvation to those who follow the path of detachment and those who merge with nature. ॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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