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सम्यग् योगजपै: शान्तिर्नियमैर्देहतापनै:।
तप्यतां या गतिर्देव परमा सा गतिर्भवान्॥ ६१॥
अनुवाद
हे प्रभु! उत्तम योग-जप और शरीर को सुखा देने वाले नियमों के पालन से जो शान्ति प्राप्त होती है, तथा तप करने वाले पुरुषों को जो दिव्य मोक्ष प्राप्त होता है, वह परम मोक्ष आप ही हैं॥61॥
O lord! The peace which is obtained by following the best yoga-japa and the rules which make the body dry, and the divine salvation which is attained by the men who perform austerities, that ultimate salvation is you only. ॥ 61॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥