श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.17.59 
इयं तुष्टिरियं सिद्धिरियं श्रुतिरियं स्मृति:।
अध्यात्मगतिरिष्टानां विदुषां प्राप्तिरव्यया॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
यह संतोष, यह सिद्धि, यह श्रुति, यह स्मृति, भक्तों की यह आध्यात्मिक उन्नति और बुद्धिमान पुरुषों की यह शाश्वत प्राप्ति (पुनरावृत्ति रहित मोक्ष की प्राप्ति) आपके अतिरिक्त और कुछ नहीं है।
 
This satisfaction, this siddhi, this shruti, this memory, this spiritual progress of the devotees and this everlasting attainment (attainment of salvation without recurrence) of the wise men are none other than You.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd