श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.17.56 
एतत् पदमनुद्विग्नमेतद् ब्रह्म सनातनम्।
शास्त्रवेदाङ्गविदुषामेतद् ध्यानं परं पदम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
यही निर्विकार परम पद है। यही सनातन ब्रह्म है। जो शास्त्रों और वेदांगों के ज्ञाता हैं, उनके लिए यही ध्यान करने योग्य परम पद है ॥ 56॥
 
This is the ultimate position without any disturbance. This is the eternal Brahman. For those who are knowledgeable about the scriptures and the Vedangas, this is the ultimate position worth meditating upon. ॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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