श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.17.51 
मृत्युर्यमो हुताशश्च काल: संहारवेगवान्।
कालस्य परमा योनि: कालश्चायं सनातन:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु, यम, अग्नि, प्रलय का तीव्र काल, काल का परम कारण तथा नित्य काल - ये सब महादेव के अतिरिक्त और कोई नहीं हैं ॥ 51॥
 
Death, Yama, fire, the rapid time for destruction, the ultimate cause of time and also the eternal time - all these are none other than Mahadeva. ॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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