श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.17.50 
रात्र्यह:श्रोत्रनयन: पक्षमासशिरोभुज:।
ऋतुवीर्यस्तपोधैर्यो ह्यब्दगुह्योरुपादवान्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
रात्रि और दिन उनके कान और आंखें हैं, पक्ष और मास उनका सिर और भुजाएं हैं, ऋतु उनका वीर्य है, तप धैर्य है और वर्ष उनकी गुप्त इंद्रियां, जंघाएं और पैर हैं।
 
Night and day are His ears and eyes, fortnight and month are His head and arms, season is His semen, austerity is patience and year is His private senses, thighs and feet.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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