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mahabharat 13.17.46-47h: प्राचीन काल में प्रजापति ने इन्हीं नीललोहित नामक भगवान की नाना प्रकार के स्तोत्रों द्वारा आराधना करके अपनी प्रजा की सृष्टि के लिए वरदान प्राप्त किया था ॥46 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.17.46-47h 
एनं प्रजापति: पूर्वमाराध्य बहुभि: स्तवै:॥ ४६॥
प्रजार्थं वरयामास नीललोहितसंज्ञितम्।
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में प्रजापति ने इन्हीं नीललोहित नामक भगवान की नाना प्रकार के स्तोत्रों द्वारा आराधना करके अपनी प्रजा की सृष्टि के लिए वरदान प्राप्त किया था ॥46 1/2॥
 
In ancient times, Prajapati had obtained a boon for the creation of his people by worshiping this same God named Neelalohit through various types of stotras. 46 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)