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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल
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श्लोक 39
श्लोक
13.17.39
ये चैनं प्रतिपद्यन्ते भक्तियोगेन भाविता:।
तेषामेवात्मनाऽऽत्मानं दर्शयत्येष हृच्छय:॥ ३९॥
अनुवाद
जो लोग भक्तिपूर्वक भगवान् की शरण में आते हैं, हृदय-मंदिर में विराजमान भगवान् उन्हीं को दर्शन देते हैं ॥39॥
Those who surrender to the Supreme Lord with devotion, the Lord who resides in the temple of the heart gives His darshan to them only. ॥ 39॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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