श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.17.36 
अयं स सत्यकामानां सत्यलोक: परं सताम्।
अपवर्गश्च मुक्तानां कैवल्यं चात्मवेदिनाम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
सत्य की इच्छा रखने वाले पुण्यात्मा पुरुषों के लिए यह उत्तम सत्यलोक है। मुक्त पुरुषों का मोक्ष और आत्मज्ञानी पुरुषों का कैवल्य यही है। 36.
 
This is the best Satyalok for the virtuous people who desire the truth. This is the salvation of the liberated people and the Kaivalya of the self-enlightened people. 36.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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