श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.17.33 
अयं च सर्वभूतानां शुभाशुभगतिप्रद:।
अयं च जन्ममरणे विदध्यात् सर्वजन्तुषु॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वे ही समस्त प्राणियों को शुभ-अशुभ गतियाँ प्रदान करते हैं। वे ही समस्त प्राणियों को जन्म-मरण प्रदान करते हैं ॥33॥
 
It is He who imparts auspicious and inauspicious movements to all beings. It is He who imparts birth and death to all beings. ॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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