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श्लोक 13.17.28  |
सेयमासादिता साक्षात् त्वद्भक्तिर्जन्मभिर्मया।
भक्तानुग्रहकृद् देवो यं ज्ञात्वामृतमश्नुते॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| अब अनेक जन्मों के पश्चात् मुझे आपकी यह भक्ति प्राप्त हुई है। आप अपने भक्तों पर कृपा करने वाले महान् ईश्वर हैं। आपको जानकर बुद्धिमान् पुरुष मोक्ष प्राप्त करते हैं॥28॥ |
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| Now after many births I have achieved this devotion to you. You are the great God who showers grace on his devotees. By knowing you, the wise attain salvation. ॥28॥ |
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