श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.17.28 
सेयमासादिता साक्षात् त्वद्भक्तिर्जन्मभिर्मया।
भक्तानुग्रहकृद् देवो यं ज्ञात्वामृतमश्नुते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
अब अनेक जन्मों के पश्चात् मुझे आपकी यह भक्ति प्राप्त हुई है। आप अपने भक्तों पर कृपा करने वाले महान् ईश्वर हैं। आपको जानकर बुद्धिमान् पुरुष मोक्ष प्राप्त करते हैं॥28॥
 
Now after many births I have achieved this devotion to you. You are the great God who showers grace on his devotees. By knowing you, the wise attain salvation. ॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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