श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.17.27 
अहो मूढा: स्म सुचिरमिमं कालमचेतसा।
यन्न विद्म: परं देवं शाश्वतं यं विदुर्बुधा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
अज्ञानवश हम इतने समय तक मोह में पड़े रहे, क्योंकि अब तक हम उस सनातन परमेश्वर को नहीं जान पाए, जिसे विद्वान पुरुष जानते हैं ॥27॥
 
Oh! due to ignorance we have remained in delusion for such a long time, because till now we were not able to know the same eternal Supreme God, whom the learned men know. ॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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