श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.17.26 
नूनमद्य कृतार्था: स्म नूनं प्राप्ता: सतां गतिम्।
यां गतिं प्रार्थयन्तीह ज्ञाननिर्मलबुद्धय:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध बुद्धि वाले बुद्धिमान पुरुष यहाँ जो गति प्राप्त करना चाहते हैं, वही गति सत्पुरुषों की है, सो आज हमें अवश्य ही सफलता प्राप्त हो गई है ॥26॥
 
The progress that wise men with pure intellect want to achieve here, we have definitely achieved the same speed of good men; So today we have definitely achieved success. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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