श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.17.23 
भूर्वायु: सलिलाग्निश्च खं वाग्बुद्धि: स्थितिर्मति:।
कर्म सत्यानृते चोभे त्वमेवास्ति च नास्ति च॥ २३॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि, आकाश, वाणी, बुद्धि, अवस्था, मन, कर्म, सत्य, असत्य तथा अस्ति और नास्ति भी आप ही हैं ॥23॥
 
Earth, air, water, fire, sky, speech, intellect, state, mind, action, truth, untruth and asti and nasti are also you. 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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