श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.17.20 
अनिच्छतस्तव विभो जन्ममृत्युरनेकत:।
द्वारं तु स्वर्गमोक्षाणामाक्षेप्ता त्वं ददासि च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! यदि आप स्वयं किसी जीव का उद्धार नहीं करेंगे, तो वह बार-बार जन्म-मरण में पड़ा रहेगा। आप ही स्वर्ग और मोक्ष के द्वार हैं। आप ही उनकी प्राप्ति में विघ्न डालने वाले हैं और आप ही इन दोनों को प्रदान करने वाले भी हैं।
 
Prabhu! If you yourself do not kindly save a living being, then he will keep on taking births and deaths again and again. You are the door to heaven and salvation. You are the one who creates obstacles in their attainment and you are the one who provides both these things.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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