श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 17: उपमन्यु-श्रीकृष्ण-संवाद—महात्मा तण्डिद्वारा की गयी महादेवजीकी स्तुति, प्रार्थना और उसका फल  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.17.18 
अधिपौरुषमध्यात्ममधिभूताधिदैवतम्।
अधिलोकाधिविज्ञानमधियज्ञस्त्वमेव हि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आप ही आदिपुरुष, अध्यात्म, अधिभूत, अधिदैवत, अधिलोक, अधिविज्ञान और अधियज्ञ हैं। 18॥
 
You are the Adhipurusha, Adhyatma, Adhibhuta, Adhidaivat, Adhilok, Adhivigyan and Adhiyagya. 18॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd