श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 169: भगवान‍् श्री कृष्णकी महिमाका वर्णन और भीष्मजीका युधिष्ठिरको राज्य करनेके लिये आदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.169.22 
सोऽयं पुरुषशार्दूलो मेघवर्णश्चतुर्भुज:।
संश्रित: पाण्डवान् प्रेम्णा भवन्तश्चैनमाश्रिता:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वही चतुर्भुजी घनश्याम पुरुषसिंह श्रीकृष्ण प्रेमपूर्वक तुम पाण्डवों पर आश्रित हैं और तुम भी उन्हीं की शरण में आये हो॥22॥
 
The same four-armed Ghanshyam Purushsingh Sri Krishna is lovingly dependent on you Pandavas and you too have taken refuge in him. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)