श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.168.8 
परमात्मा हृषीकेश: सर्वव्यापी महेश्वर:।
न तस्मात् परमं भूतं त्रिषु लोकेषु किंचन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वे ही परब्रह्म हैं, इन्द्रियों के प्रेरक हैं और सर्वव्यापी महेश्वर हैं। तीनों लोकों में उनसे बड़ा कोई नहीं है ॥8॥
 
He is the Supreme Being, the motivator of the senses and the omnipresent Maheshwar. There is no one greater than Him in the three worlds. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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