श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.168.7 
स हि देववर: साक्षाद् देवनाथ: परंतप:।
सर्वज्ञ: सर्वसंश्लिष्ट: सर्वग: सर्वतोमुख:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे देवताओं में श्रेष्ठ, देवताओं के रक्षक, शत्रुओं को पीड़ा देने वाले, सर्वज्ञ, सबमें लीन, सर्वव्यापी और सर्वत्र विद्यमान हैं॥7॥
 
He is the best among the gods, the protector of the gods, the one who torments the enemies, the omniscient, the one who is immersed in everything, the omnipresent one and the one who is present everywhere. 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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