तपोधानो! मैंने तुम पर दया करके भगवान् का पवित्र माहात्म्य बताया है, जिससे तुम प्रयत्नपूर्वक उन यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण का पूजन करो॥62॥
Tapodhano! Out of kindness to you, I have explained the sacred greatness of God so that you worship that Yadukulatilaka Shri Krishna with effort. 62॥
इतिश्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पुरुषमाहात्म्ये सप्तचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें परमपुरुष श्रीकृष्णका माहात्म्यविषयक एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥