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श्लोक 13.168.62  |
एष वोऽनुग्रह: प्रोक्तो मया पुण्यस्तपोधना:।
यद् भवन्तो यदुश्रेष्ठं पूजयेयु: प्रयत्नत:॥ ६२॥ |
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| अनुवाद |
| तपोधानो! मैंने तुम पर दया करके भगवान् का पवित्र माहात्म्य बताया है, जिससे तुम प्रयत्नपूर्वक उन यदुकुलतिलक श्रीकृष्ण का पूजन करो॥62॥ |
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| Tapodhano! Out of kindness to you, I have explained the sacred greatness of God so that you worship that Yadukulatilaka Shri Krishna with effort. 62॥ |
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इतिश्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि पुरुषमाहात्म्ये सप्तचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें परमपुरुष श्रीकृष्णका माहात्म्यविषयक एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४७॥
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