श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  13.168.59 
स च शेषो विचरते परया वै मुदा युत:।
अन्तर्वसति भोगेन परिरभ्य वसुन्धराम्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
वे भगवान् शेष महान् आनन्दपूर्वक सर्वत्र विचरण करते हैं और अपने विशाल शरीर से पृथ्वी को आलिंगन करते हुए पाताल में निवास करते हैं ॥59॥
 
That Lord Shesha moves everywhere with great joy and, embracing the earth with his huge body, resides in the netherworld. ॥ 59॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd