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श्लोक 13.168.59  |
स च शेषो विचरते परया वै मुदा युत:।
अन्तर्वसति भोगेन परिरभ्य वसुन्धराम्॥ ५९॥ |
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| अनुवाद |
| वे भगवान् शेष महान् आनन्दपूर्वक सर्वत्र विचरण करते हैं और अपने विशाल शरीर से पृथ्वी को आलिंगन करते हुए पाताल में निवास करते हैं ॥59॥ |
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| That Lord Shesha moves everywhere with great joy and, embracing the earth with his huge body, resides in the netherworld. ॥ 59॥ |
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