श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  13.168.57 
चिन्तितानि समेष्यन्ति शस्त्राण्यस्त्राणि चैव ह।
अनन्तश्च स एवोक्तो भगवान‍् हरिरव्यय:॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
उनका स्मरण मात्र करने से ही समस्त दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हो जाते हैं। अविनाशी भगवान श्रीहरि को अनंत शेषनाग भी कहते हैं। 57.
 
Just by thinking about Him, one will get all the divine weapons. The indestructible Lord Shri Hari is also known as Ananta Sheshnag. 57.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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