श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  13.168.56 
शिरो नागैर्महाभोगै: परिकीर्णं महात्मभि:।
भविष्यति महाबाहो: सर्वलोकेश्वरस्य च॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
समस्त लोकों के स्वामी महाबाहु बलरामजी का सिर बड़े-बड़े फणों वाले विशाल सर्पों से घिरा होगा ॥ 56॥
 
The head of the mighty-armed Balarama, the lord of all worlds, would be surrounded by huge serpents having large hoods. ॥ 56॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd