श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  13.168.53 
तत्र च त्रितयं दृष्टं भविष्यति न संशय:।
समस्ता हि वयं देवास्तस्य देहे वसामहे॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
हम सभी देवता उनके दिव्य स्वरूप में निवास करते हैं। अतः उनके दर्शन से तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) का दर्शन हो जाता है, इसमें संशय नहीं है॥ 53॥
 
All of us gods reside in His divine form. Therefore, by seeing Him, one gets the vision of all the three gods (Brahma, Vishnu and Shiva), there is no doubt about this. ॥ 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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