श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  13.168.51 
एष वोऽभिहितो मार्गो मया वै मुनिसत्तमा:।
तं दृष्ट्वा सर्वशो देवं दृष्टा: स्यु: सुरसत्तमा:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
हे मुनियों! मैंने तुम्हें उत्तम मार्ग बताया है। सब प्रकार से भगवान वासुदेव का दर्शन करके तुम समस्त महान देवताओं को देख सकोगे॥ 51॥
 
O sages! I have told you the best path. After seeing Lord Vasudeva in all ways, you will be able to see all the great gods. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)