श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 168: वंशपरम्पराका कथन और भगवान‍् श्रीकृष्णके माहात्म्यका वर्णन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.168.49 
भुवनेऽभ्यर्चितो नित्यं देवैरपि सनातन:।
अभयेनानुरूपेण युज्यन्ते तमनुव्रता:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
वे सनातन परमेश्वर हैं, इसलिए तीनों लोकों के देवता भी उन्हें सदैव भजते हैं। जो उनके अनन्य भक्त हैं, वे अपनी भक्ति के अनुसार निर्भय पद प्राप्त करते हैं ॥ 49॥
 
He is the eternal God, hence even the gods in this three worlds always worship Him. Those who are His exclusive devotees attain a fearless position in accordance with their devotion. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)